दोस्तों जब हम गृह के बारे में बात करते हैं तो एक प्रश्न हमारे मन में जरुर आता है की मंगल ग्रह को लाल ग्रह क्यों कहते हैं? ग्रह सूर्य से चौदह करोड़ दस लाख मील की दूरी पर है। पहले खगोलशास्त्रियों का मत था कि इस ग्रह पर मनुष्य रहते हैं। इसकी चाल पृथ्वी के चाल से आधी है। इस ग्रह का अपना वायुमण्डल और इसमें बर्फ तथा कोहरे के रूप में पानी भी है। यहाँ गर्मी और सर्दी भी अधिक नहीं है।
मंगल ग्रह हर पन्द्रह या सत्तर वर्ष पश्चात् पृथ्वी से तीन करोड़ पचास लाख मील की दूरी पर रह जाता है। सन् 1970 ई. में यह पृथ्वी के बहुत निकट आ गया था। उस समय यह भय लगने लगा था कि कही यह पृथ्वी से टकरा न जाए।
मंगल ग्रह के विषय में शिवरेली नामक वैज्ञानिक ने विशेष जानकारी प्रस्तुत की थी। इस ग्रह का दिन पृथ्वी के दिन से केवल सैंतीस मिनट बड़ा होता है। दूरबीन की सहायता से इस ग्रह को बर्फ से ढकी हुई भूमि के रूप में देखी जा सकती है। इसके धरातल पर कुछ रेखाएँ दिखाई देती हैं। ये नदियाँ हैं, जो समुद्र में जाकर मिलती हैं। ये नदियाँ बहुत लम्बी हैं।
मंगल ग्रह पर कुछ काले-काले धब्बे दिखाई देते हैं। यह वहाँ की भूमि है। मंगल ग्रह के धरातल का रंग मौसम के अनुसार बदल जाता है। गर्मी के मौसम में बर्फीली घाटियाँ बहुत छोटी दिखाई देती हैं और शीतकाल में ये चौड़ी हो जाती हैं।
मंगल ग्रह पर हवा बहुत कम है। यहाँ आक्सीजन की भी कमी है। ऐसी दशा में मनुष्य का वहाँ रहना बहुत कठिन है। यह स्थान समुद्र के तट से बैसठ हजार फीट ऊँचाई पर है। आधुनिक खगोलशास्त्री वहाँ पर मनुष्य का रहना सम्भव नहीं मानते। वहाँ दोपहर बाद तापमान शून्य से ऊपर उठता है और पचास डिग्री तापमान तक चढ़ जाता है। उसमें बर्फ नहीं पिघलती, भाप बनकर चारों ओर फैल जाती है। बर्फ के कारण ठंड इतनी अधिक होती है कि वहाँ मनुष्य तो रह ही नहीं सकता।
मंगल ग्रह पर पौधे उगते हैं। उनका रंग हरा होता है और उन पर कीटाणुओं के होने की सम्भावना की जा रही है। इस ग्रह के विषय में एक रोचक बात यह है कि इसके चारों ओर चन्द्रमा जैसे दो चन्द्रमा और चक्कर लगाते हैं। ये चन्द्रमा हमारे चन्द्रमा से बहुत
छोटे और हल्के हैं। इनमें फीबास का व्यास दस मील और डोमॉस का व्यास पाँच मील है। फीबोस वहाँ से केवल चार हजार मील की दूरी पर है। यह तीन घण्टे में इस ग्रह का चक्कर लगाता है।
मंगल ग्रह जिस दिशा में सूर्य का चक्कर लगाता है, ये चन्द्रमा भी उसी दिशा में चलते हैं। फीबोस पूर्व से उदय होता है और पश्चिम में अस्त होता है। डोमॉस भी पूर्व दिशा से ही उदय होता है और दो दिन-रात तक आकाश में रहता है। इन दोनों की दिशाएँ अलग-अलग हैं। इनकी आकर्षण- शक्ति बहुत कम है।
मंगल ग्रह कभी-कभी अपने रास्ते से हटकर पृथ्वी के बहुत निकट आ जाता है। सन् 1932 में एक ऐसा ही ग्रह पृथ्वी से पैंसठ मील की दूरी पर आ गया था। वह ग्रह इतना निकट आने पर भी पृथ्वी से टकराया नहीं था, क्योंकि इसका अपना आकर्षण इसे कभी अन्य ग्रह से नहीं टकराने देता।
मंगल ग्रह को लाल ग्रह क्यों कहते हैं?
मंगल ग्रह की सतह पर मुख्यरूप से लौह ऑक्साइड पाई जाती है और इसका रंग लाल होता है इसी के कारण इस ग्रह को लाल गृह कहा जाता है।


