अक्सर परीक्षा में यह प्रश्न पूछा जाता है की -शनि ग्रह के कितने चंद्रमा है?शनि ग्रह की विशेषता क्या है ? आज के पोस्ट में इसी विषय के बारे में पूरी जानकारी शेयर करेंगे । शनि ग्रह बहुत हल्का है। इस ग्रह पर सोलह हजार मील लम्बी बादलों की परतें हैं। इसका वायु- मण्डल विषैला है। यह एमोनिया और मीथेन से भरा हुआ है। यह ग्रह बीच में से अधिक उभरा हुआ है और ऊपर-नीचे से दबा हुआ है।
शनि ग्रह के कितने चंद्रमा है?
शनि ग्रह के नौ चन्द्रमा हैं। जो इसके चारों और चक्कर से दिखाई देते हैं। यह चक्कर शनि ग्रह से एक लाख मील अधिक चौड़े हैं। दूरबीन से इन चक्करों में कई-कई भाग दिखाई देते हैं। यह चक्कर ठोस नहीं हैं, इनके पीछे तारे चमकते दिखाई देते हैं। इन सभी चक्करों का हर भाग चन्द्रमा की तरह घूमता है। इसके अन्दर के भाग तेजी से घूमते हैं और बाहरी भाग मन्द गति से। ये शनि ग्रह के चन्द्रमा हैं।
शनि- ग्रह ये चक्र बहुत से छोटे-छोटे चन्द्रमाओं से बने हैं। यह चन्द्रमा किसी पदार्थ के टुकड़े हैं। बहुत से वैज्ञानिकों का यह मत है कि किसी ग्रह के निकट आने पर खण्डित होकर इस तरह के टुकड़े बन जाते हैं। यह टुकड़े पृथक-पृथक राहों पर चलना आरम्भ कर देते हैं। यह टुकड़ तीव्र गति से चलने वाले होते हैं। तीव्र गति से चलने वाले टुकड़ी ओर तथा मन्द गति से चलने वाले बाहर की चले जाते हैं।
शनि ग्रह तीन वर्ष में सूर्य का एक चक्कर लगाता है। यह पृथ्वी से कम गति से चलता है। शनि ग्रह एक दिशा में झुका हुआ है। इस ग्रह का उत्तरी भाग पहले दिखाई। देता है और दक्षिणी भाग बाद में दिखाई देता है। यह स्थिति इसके झुके रहने के कारण है।
इन बड़े ग्रहों कि खोज के बाद संसार के वैज्ञानिकों ने सेरस, पालास, जून और वेस्टा आदि ग्रहों की खोज की। इन ग्रहों में सेरस का व्यास सौ अस्सी मील, पालास का व्यास तीन सौ मील और वेस्टा का व्यास दो सौ चालीस मील है। इन ग्रहों के अतिरिक्त सौ मील के व्यास वाले लगभग बारह ग्रह और खोजे गए हैं। इन ग्रहों में से कुछ गोल हैं और कुछ दूसरे अन्य प्रकार के हैं।
इन ग्रहों का भार भी बहुत ही कम होता है और इनकी चाल एक सैकेंड में एक तिहाई मील से अधिक नहीं है। वेस्टा ग्रह को छोड़कर अन्य ग्रह दूरबीन से भी कठिनाई से देखे जा सकते हैं। संसार के वैज्ञानिकों ने इन सभी ग्रहों के चित्र कैमरे में उतार लिए हैं।
संसार के खगोलशास्त्रियों ने इन सात ग्रहों के अलावा कुछ और नए ग्रहों की भी खोज की है। इन ग्रहों में यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो हैं। यूरेनस शनि ग्रह से एक अरब मील की दूरी पर है और नेपच्यून यूरेनस से एक अरब मील दूर है। इन ग्रहों के पास तक सूर्य की गर्मी बहुत कम पहुँचती है। इन ग्रहों का तापमान शून्य से तीन सौ अंश नीचा रहता है। यहाँ पर अमोनिया भी बर्फ की तरह जमा है। यह सभी ग्रह मीथेन के बादलों के नीचे बर्फ से ढ़के हैं।
यह सभी ग्रह पृथ्वी से बड़े हैं। इनमें यूरेनस के पाँच और नेपच्यून के दो चन्द्रमा हैं। नेपच्यून को दूरबीन की सहायता से देखा जा सकता है। ये ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते रहते हैं। यूरेनस चौरासी वर्ष में सूर्य का एक चक्कर लगाता है और नेपच्यून को सूर्य का चक्कर लगाने में एक सौ अड़सठ वर्ष लगते हैं। प्लूटो तीसरा नया गर्म ग्रह है। इस ग्रह का एक वर्ष हमारे चौबीस वर्षो के होता है
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