सूर्य क्या है ग्रह या तारा
हमारी आकाश गंगा में एक चमकता हुआ तारा है, जिसे हम सूर्य कहकर पुकारते हैं। यह तारा अरबों वर्ष तक अपनी कीली पर घूमता हुआ आकाश-गंगा का चक्कर लगाता रहा।
धीरे-धीरे सूर्य की चाल धीमी पड़ती गई और उसका तापमान कम होता गया। बड़े आग के गोले की तरह इस तारे में भी विस्फोट हुए और इसके कुछ टुकड़े छिटककर इससे दूर हो गए, परन्तु यह उसी तरह बना रहा।
सूर्य से छिटककर जो टुकड़े आकाश में बिखरे, उन्हें हम सूर्य-मण्डल के ग्रह कहते हैं। हमारी यह पृथ्वी, चन्द्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि इत्यादि ग्रह इसी सूर्य के छिटके हुए टुकड़े हैं। इसीलिए यह सभी अपनी-अपनी कीलियों पर घूमते हुए भी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं और फिर सूर्य के साथ मिलकर आकाश में चारों ओर एक ही दिशा में चक्कर लगाते हुए आकाश गंगा का चक्कर लगाते रहते हैं। सूर्य पृथ्वी तथा अन्य ग्रहों को गर्मी और प्रकाशदेता है।
सूर्य पृथ्वी के आकार से कितना बड़ा है?
हमें देखने में बहुत छोटा और अपनी पृथ्वी बहुत बड़ी लगती है। यह इसलिए कि सूर्य हम से बहुत दूर है। जो चीज जितनी दूर होती है, वह उतनी ही छोटी दिखाई देती है। खगोलशास्त्रियों ने अनुमान लगाया है कि सूर्य पृथ्वी से लगभग तेरह लाख किलोमीटर गुना बड़ा है जो पृथ्वी से लगभग 109 गुना अधिक है । सूर्य की गर्मी और प्रकाश से ही हमें अपनी पृथ्वी पर यह हरियाली और जीवन का विकास दिखाई देता है।
यदि पृथ्वी को यह गर्मी और प्रकाश सूर्य से प्राप्त न हो तो यह बर्फ से ढक जायेगा । इस पर चौबीसों घण्टे अंधेरा छाया रहेगा। फिर ना तो दिन होगा और ना ही रात। गर्मी, सर्दी और बरसात के मौसम भी समाप्त हो जाएँगे। यह होने के पश्चात् किसी भी मौसम का पता लगाना कठिन होगा।
सूर्य की गर्मी से समुद्रों का पानी भाप बनकर आकाश में उड़ जाता है और फिर वह भाप, बादलों का रूप धारण कर पृथ्वी पर वर्षा करती है। सूर्य के इतने दूर होने के कारण पृथ्वी पर सूर्य की गर्मी बहुत कम आ पाती है। सूर्य – तल का तापमान इक्कीस हज़ार डिग्री फॅरनहाइट है। सूर्य से ही पृथ्वी को आकर्षण शक्ति मिलती है। सूर्य एक सैकण्ड में चालीस लाख टन शक्ति फेंकता है।
पृथ्वी इस शक्ति में से बहुत कम ग्रहण कर पाती है। पृथ्वी केवल चार सौ पौंड प्रति सैकेंड शक्ति ग्रहण करती है। यह शक्ति बहुत मूल्यवान है। एक दिन में हमें सूर्य से दो सौ तिहत्तर टन शक्ति मिलती है। यदि इस शक्ति के मूल्य का अनुमान लगायें तो एक घण्टे में प्राप्त होने वाली शक्ति का मूल्य लगभग एक सौ तिहत्तर खरब डालर होगा।
सूर्य यह शक्ति पृथ्वी और अपने अन्य सब ग्रहों पर जब से बने हैं, बराबर बिखेरता आ रहा है। इतनी शक्ति बिखेरने पर भी आज तक सूर्य ठण्डा नहीं हुआ। इसका कारण यह है कि यह शक्ति बिखेरने के साथ-साथ शक्ति पैदा भी करता है। यह गैस तरल और हल्की नहीं है। यह गैस पानी से भी भारी है। दूर से देखने पर सूर्य हमें गोल दिखाई देता है। सूर्य का यह गोला गैस का बना हुआ है परन्तु यह वास्तव में गोल नहीं है। इसकी गैस के कण झरने की बूँदों की तरह चारों ओर झरते हैं।
सूर्य इतना चमकदार है कि इसकी तरफ देखा नहीं जा सकता। सूर्य ग्रहण के दिन सूर्य की चमक कम होने पर इसकी तरफ देखा जा सकता है। उस समय अगर दूरबीन से देखा जाये तो ये गैस के झरने साफ दिखाई देते हैं। ये झरने सहस्रों मील लम्बे होते हैं। सूर्य के चारों ओर सफेद प्रकाश का एक घेरा है। यह लोहा, चूना और गिलट की गैस है। यह बहुत नर्म और भारी होती है। यह गैस का घेरा सूर्य के साथ-साथ चक्कर लगाता है।
क्या सूर्य परकाले धब्बे हैं ?
सूर्य भी पृथ्वी की तरह अपनी ही कीली पर चक्कर लगाता है। सूर्य की चाल बहुत मन्दी है। गैलीलियो ने अपनी दूरबीन में देखकर बताया था कि सूर्य पर काले धब्बे हैं और यह ठोस पदार्थ का बना हुआ नहीं है। इन धब्बों के बहुत से गुच्छे होते हैं। ये धब्बे घटते-बढ़ते रहते हैं। इन धब्बों में जो ऊपर और नीचे के धब्बे हैं, वे बीच के धब्बों से मन्दी चाल से घूमते हैं। ये धब्बे जितना समय एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने में लेते हैं, वह सूर्य का एक दिन कहलाता है।
यह दिन भूमध्य रेखा पर पच्चीस और दक्षिणी तथा उत्तर ध्रुवों पर तीस दिन का होता है। इन धब्बों में सूर्य के अन्य भागों से कम गर्मी होती इन धब्बों का तापमान आठ हजार डिग्री फेरनहाइट है। ये धब्बे ठीक वैसे ही होते हैं जैसे हम आंधी में बगले उठते हुए देखते हैं। इनमें गैस बराबर ऊपर-नीचे उठती और गिरती रहती है।
सूर्य के इन धब्बों की संख्या घटती-बढ़ती रहती है। जब सूर्य में अधिक शक्ति होती है तो इन धब्बों की संख्या लगभग दो सौ हो जाती है। जब शक्ति का संचार कम होता है, ये पचास-पचपन के करीब रह जाते हैं। ग्यारह वर्ष तक इन धब्बों की संख्या बढ़ती है और फिर घटने लगती है।
सूर्य में प्रकाश ऐसे उबलता है जैसे हम दूध में उबाल आता हुआ देखते है। जब यह प्रकाश अधिक होता है तो पृथ्वी पर आकर्षण शक्ति बढ़ जाती है और ध्रुवों पर भी प्रकाश अधिक हो जाता है।
सूर्य क्या है ?सूर्य किन तत्वों से बनी है ?
सूर्य आकाश गंगा में एक चमकता हुआ तारा है जिन तत्वों का बना हुआ है, हमारी दुनिया भी उन्हीं तत्वों की बनी हुई है। यों देखने में हमें ये भिन्न प्रकार के लगते हैं लेकिन वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि इन दोनों में कोई अन्तर नहीं है। सूर्य में आक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन, लोहा, गंधक, सोडियम और हिलियम तत्व हैं। इन्हीं तत्वों से हमारी यह दुनिया बनी हुई है।
सूर्य की आयु अब अरबों वर्ष की हो चुकी है। इसके तापमान में भी कमी आ गई है। चाल भी पहले से बहुत मन्दी हो गई है, परन्तु अभी उसकी शक्ति इतनी है कि वह अपनी और अपने ग्रहों की जरूरत पूरी करता है। उसी शक्ति से ये ग्रह चल रहे हैं। हमारी यह पृथ्वी भी सूर्य की उसी शक्ति से चल रही है। पृथ्वी के निर्माण के बारे में वैज्ञानिकों का एक मत यह है कि यह सूर्य का एक भाग है जो सूर्य से छिटक कर पृथक हो गया था वह स्वतन्त्र होकर ब्रह्माण्ड में घूमने लगा। https://easyanswer.in/2023/01/28/%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%9a-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82/


